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हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय का हिंदी विभाग अपने उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण, विद्वान अध्यापकों तथा शोधोन्मुख दृष्टिकोण के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। एक पूर्व शोधार्थी के रूप में मेरा अनुभव अत्यंत प्रेरणादायक रहा है। यहाँ हिंदी भाषा, साहित्य, आलोचना और समकालीन विमर्शों का गंभीर अध्ययन कराया जाता है, जिससे विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन और अकादमिक दृष्टि का विकास होता है। विभाग का सौहार्दपूर्ण वातावरण, समृद्ध पुस्तकालय तथा विविध शैक्षणिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह विभाग न केवल ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि साहित्यिक और मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है। हिंदी विभाग में एक शोधार्थी के रूप में अध्ययन करना, मेरे लिए एक गर्व का विषय है।
हैदराबाद विश्वविद्यालय के यशस्वी हिन्दी विभाग के एम. फिल. पाठ्यक्रम में मेरा प्रवेश सन् 1985 में हुआ।उस समय समस्त मानविकी संकाय की कक्षाएँ नगर के हृदय स्थल में अवस्थित ऐतिहासिक महत्व के भवन 'गोल्डेन थ्रेशोल्ड ' में संचालित होती थीं। विश्वविद्यालय परिसर स्थित छात्रावास से विश्वविद्यालय की बस से आना - जाना होता था। अध्यापकों की संख्या कम होने के बावजूद कक्षाएँ नियमित रूप से चलती थीं। अध्ययन - अध्यापन का बेहतरीन वातावरण विभाग का वैशिष्ट्य था। समृद्ध पुस्तकालय का अधिकाधिक उपयोग करने की होड़ विद्यार्थियों में लगी रहती थी। विभाग के शिक्षकों तथा शोधार्थियों के साथ अकादमिक संवाद के अवसर सुलभ थे। विभाग अपने राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण आयोजनों के कारण देश भर में प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुका था। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पर केंद्रित संगोष्ठी की अनुगूंज आज तक कायम है। एम. फिल.के दौरान ही जे. आर. एफ. के प्रथम बैच की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने का सौभाग्य मिला था। हिन्दी विभाग का छात्र बनकर मैंने गौरवान्वित महसूस किया है।तब भी और आज भी। मेरे अकादमिक व्यक्तित्व के निर्माण में इस विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
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